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mahabharat 6.110.29-d2h: भरत! वे दोनों ही रथियों में श्रेष्ठ और अजेय योद्धा थे। वे दोनों अपनी प्रभा और आभा से चन्द्रमा और सूर्य के समान शोभायमान थे। और भरत! दु:शासन और अर्जुन दोनों ही वृत्रासुर और इन्द्र के समान तेजस्वी थे। वे दोनों क्रोध से भरे हुए थे और एक-दूसरे को मार डालना चाहते थे। उस महायुद्ध में वे एक-दूसरे से उसी प्रकार युद्ध कर रहे थे, जैसे पूर्वकाल में मयासुर और इन्द्र आपस में युद्ध करते थे। 29-30 1/2।   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 29-d2h
 
 
श्लोक  6.110.29-d2h 
उभौ तौ रथिनां श्रेष्ठावुभौ भारत दुर्जयौ॥ २९॥
उभौ चन्द्रार्कसदृशौ कान्त्या दीप्त्या च भारत।
तथा तौ जातसंरम्भावन्योन्यवधकाङ्क्षिणौ॥ ३०॥
(दु:शासनार्जुनौ वीरौ वृत्रेन्द्रसमतेजसौ।)
समीयतुर्महासंख्ये मयशक्रौ यथा पुरा।
 
 
अनुवाद
भरत! वे दोनों ही रथियों में श्रेष्ठ और अजेय योद्धा थे। वे दोनों अपनी प्रभा और आभा से चन्द्रमा और सूर्य के समान शोभायमान थे। और भरत! दु:शासन और अर्जुन दोनों ही वृत्रासुर और इन्द्र के समान तेजस्वी थे। वे दोनों क्रोध से भरे हुए थे और एक-दूसरे को मार डालना चाहते थे। उस महायुद्ध में वे एक-दूसरे से उसी प्रकार युद्ध कर रहे थे, जैसे पूर्वकाल में मयासुर और इन्द्र आपस में युद्ध करते थे। 29-30 1/2।
 
Bharata! Both of them were the best among charioteers and were invincible warriors. Both of them looked like the moon and the sun in their radiance and glow. And Bharata! Both Dushasan and Arjuna were as radiant as Vritrasura and Indra. Both of them were filled with anger and desired to kill each other. In that great war, they were fighting with each other in the same way as Mayasura and Indra used to fight with each other in the past. 29-30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)