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mahabharat 6.110.25-26h: महाराज! महारथी दु:शासन ने अपना भय त्यागकर भीष्म के प्राण बचाने के लिए धनंजय पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  6.110.25-26h 
दु:शासनो महाराज भयं त्यक्त्वा महारथ:॥ २५॥
भीष्मस्य जीविताकाङ्क्षी धनंजयमुपाद्रवत्।
 
 
अनुवाद
महाराज! महारथी दु:शासन ने अपना भय त्यागकर भीष्म के प्राण बचाने के लिए धनंजय पर आक्रमण किया।
 
Maharaj! The great warrior Dushasan left his fear behind and attacked Dhananjaya to save Bhishma's life. 25 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)