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mahabharat 6.110.20-23h: धृष्टद्युम्न ने अपने सैनिकों को बार-बार पुकारा, 'वीरों! तुम सब लोग उत्तेजित होकर एकमात्र पराक्रमी भीष्म पर आक्रमण करो। कुरुवंश को आनन्द पहुँचाने वाले अर्जुन युद्धभूमि में भीष्म पर आक्रमण कर रहे हैं। तुम भी उन पर आक्रमण करो। डरो मत। भीष्म तुम सबको नहीं पकड़ सकेंगे। इन्द्र भी युद्धभूमि में अर्जुन के साथ युद्ध करने में समर्थ नहीं हो सकते; फिर धैर्य और बल से हीन भीष्म युद्धभूमि में उनका सामना कैसे कर सकेंगे? अब उनका जीवन थोड़ा ही शेष है।'   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 20-23h
 
 
श्लोक  6.110.20-23h 
धृष्टद्युम्नस्तु सैन्यानि प्राक्रोशत पुन: पुन:॥ २०॥
अभिद्रवत संरब्धा भीष्ममेकं महाबलम्।
एषोऽर्जुनो रणे भीष्मं प्रयाति कुरुनन्दन:॥ २१॥
अभिद्रवत मा भैष्ट भीष्मो हि प्राप्स्यते न व:।
अर्जुनं समरे योद्‍धुं नोत्सहेतापि वासव:॥ २२॥
किमु भीष्मो रणे वीरा गतसत्त्वोऽल्पजीवित:।
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न ने अपने सैनिकों को बार-बार पुकारा, 'वीरों! तुम सब लोग उत्तेजित होकर एकमात्र पराक्रमी भीष्म पर आक्रमण करो। कुरुवंश को आनन्द पहुँचाने वाले अर्जुन युद्धभूमि में भीष्म पर आक्रमण कर रहे हैं। तुम भी उन पर आक्रमण करो। डरो मत। भीष्म तुम सबको नहीं पकड़ सकेंगे। इन्द्र भी युद्धभूमि में अर्जुन के साथ युद्ध करने में समर्थ नहीं हो सकते; फिर धैर्य और बल से हीन भीष्म युद्धभूमि में उनका सामना कैसे कर सकेंगे? अब उनका जीवन थोड़ा ही शेष है।'
 
Dhrishtadyumna repeatedly called out to his soldiers, 'Heroes! All of you must be excited and attack the only mighty Bhishma. Arjuna, who has brought joy to the Kuru clan, is attacking Bhishma in the battlefield. You too attack him. Do not be afraid. Bhishma will not be able to catch you all. Even Indra may not be able to fight with Arjuna in the battlefield; then how can Bhishma, who is bereft of patience and strength, face him in the battlefield? Now he has only a short life left.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)