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mahabharat 6.110.14-d1h: सात्यकि को युद्ध के लिए जाते देख आपके पुत्र दुर्योधन ने सात्यकि को रोक लिया, जो पाण्डवों की प्रसन्नता के लिए भीष्म को मारना चाहता था॥14॥   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 14-d1h
 
 
श्लोक  6.110.14-d1h 
सात्यकिं समरे यान्तं तव पुत्रो न्यवारयत्॥ १४॥
(भीष्मस्य वधमिच्छन्तं पाण्डवप्रीतिकाम्यया।)
 
 
अनुवाद
सात्यकि को युद्ध के लिए जाते देख आपके पुत्र दुर्योधन ने सात्यकि को रोक लिया, जो पाण्डवों की प्रसन्नता के लिए भीष्म को मारना चाहता था॥14॥
 
Seeing Satyaki going for war, your son Duryodhana stopped Satyaki, who wanted to kill Bhishma for the happiness of Pandavas. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)