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mahabharat 6.110.10-11h: महाराज! भीमसेन भी अत्यन्त क्रोधित होकर गंगानन्दन भीष्म को मारना चाहते थे; किन्तु सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवाण ने तुरन्त आकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया॥10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  6.110.10-11h 
भीमसेनं सुसंक्रुद्धं गाङ्गेयस्य वधैषिणम्॥ १०॥
त्वरमाणो महाराज सौमदत्तिर्न्यवारयत्।
 
 
अनुवाद
महाराज! भीमसेन भी अत्यन्त क्रोधित होकर गंगानन्दन भीष्म को मारना चाहते थे; किन्तु सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवाण ने तुरन्त आकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया॥10 1/2॥
 
Maharaj! Bhimsen also became very angry and wanted to kill Ganganandan Bhishma; But Somdutt's son Bhurishravane immediately came and stopped them from moving forward. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)