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mahabharat 6.110.1-2: संजय कहते हैं - हे राजन! युद्धस्थल में भीष्म का पराक्रम देखकर अर्जुन ने शिखण्डी से कहा - 'वीर! तुम्हें पितामह का सामना करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। आज तुम्हें भीष्म से किसी भी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। मैं स्वयं उनके उत्तम रथ से अपने तीखे बाणों द्वारा उनका वध करूँगा।'॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 6.110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 110: अर्जुनके प्रोत्साहनसे शिखण्डीका भीष्मपर आक्रमण और दोनों सेनाओंके प्रमुख वीरोंका परस्पर युद्ध तथा दु:शासनका अर्जुनके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  6.110.1-2 
संजय उवाच
अर्जुनस्तु रणे राजन् दृष्ट्वा भीष्मस्य विक्रमम्।
शिखण्डिनमथोवाच समभ्येहि पितामहम्॥ १॥
न चापि भीस्त्वया कार्या भीष्मादद्य कथंचन।
अहमेनं शरैस्तीक्ष्णै: पातयिष्ये रथोत्तमात्॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! युद्धस्थल में भीष्म का पराक्रम देखकर अर्जुन ने शिखण्डी से कहा - 'वीर! तुम्हें पितामह का सामना करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। आज तुम्हें भीष्म से किसी भी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। मैं स्वयं उनके उत्तम रथ से अपने तीखे बाणों द्वारा उनका वध करूँगा।'॥1-2॥
 
Sanjaya says - O King! Seeing the valour of Bhishma on the battlefield, Arjuna said to Shikhandi - 'Valiant! You should go ahead to face your grandfather. Today you should not fear Bhishma in any way. I myself will kill him with my sharp arrows from his excellent chariot.'॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)