श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 11: शाकद्वीपका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.11.17 
ततो नित्यमुपादत्ते वासव: परमं जलम्।
ततो वर्षं प्रभवति वर्षकाले जनेश्वर॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इन्द्र सदैव वहाँ से उत्तम जल ग्रहण करते हैं। इसीलिए वर्षा ऋतु में वे पर्याप्त जल बरसा पाते हैं ॥17॥
 
O Lord! Indra always takes the best water from there. That is why during the rainy season he is able to rain enough water. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)