vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 11: शाकद्वीपका वर्णन
»
श्लोक 17
श्लोक
6.11.17
ततो नित्यमुपादत्ते वासव: परमं जलम्।
ततो वर्षं प्रभवति वर्षकाले जनेश्वर॥ १७॥
अनुवाद
हे प्रभु! इन्द्र सदैव वहाँ से उत्तम जल ग्रहण करते हैं। इसीलिए वर्षा ऋतु में वे पर्याप्त जल बरसा पाते हैं ॥17॥
O Lord! Indra always takes the best water from there. That is why during the rainy season he is able to rain enough water. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×