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mahabharat 6.109.38: शान्तनुपुत्र भीष्म उस समय अनेक योद्धाओं के साथ अकेले युद्ध करते हुए बाणों से आच्छादित हो रहे थे और मेघ समूह से घिरे हुए महान् मेरुकी पर्वत के समान शोभा पा रहे थे। 38.   |   mahabharat अध्याय 6.109: भीष्म और दुर्योधनका संवाद तथा भीष्मके द्वारा लाखों सैनिकोंका संहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 109: भीष्म और दुर्योधनका संवाद तथा भीष्मके द्वारा लाखों सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.109.38 
संयुद्धॺमानो बहुभिर्भीष्म: शान्तनवस्तथा।
अवकीर्णो महामेरु: शैलो मेघैरिवावृत:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
शान्तनुपुत्र भीष्म उस समय अनेक योद्धाओं के साथ अकेले युद्ध करते हुए बाणों से आच्छादित हो रहे थे और मेघ समूह से घिरे हुए महान् मेरुकी पर्वत के समान शोभा पा रहे थे। 38.
 
While fighting alone with many warriors, Shantanu's son Bhishma was at that time covered with arrows and looking as beautiful as the great mountain Meruki surrounded by a group of clouds. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)