श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 109: भीष्म और दुर्योधनका संवाद तथा भीष्मके द्वारा लाखों सैनिकोंका संहार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.109.28 
अद्य चापि महत् कर्म प्रकरिष्ये महाबल।
अहं वाद्य हत: शेष्ये हनिष्ये वाद्य पाण्डवान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी योद्धा! आज भी मैं एक महान् कार्य करूँगा। या तो आज मैं युद्धभूमि में मरकर सो जाऊँगा या पाण्डवों का वध करूँगा॥ 28॥
 
O mighty warrior! Today also I will perform a great deed. Either today I will die and fall asleep on the battlefield or I will kill the Pandavas.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)