श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक d1h-12
 
 
श्लोक  6.108.d1h-12 
पुत्रैस्तव दुराधर्षो रक्षित: सुमहाबलै:।
(प्रययौ पाण्डवानीकं भीष्म: शान्तनुनन्दन:।)
ततो द्रोणो महेष्वास: पुत्रश्चास्य महाबल:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वीर और साहसी वीर शान्तनुनन्दन भीष्म आपके पराक्रमी पुत्रों द्वारा सुरक्षित पाण्डवों की सेना की ओर बढ़ें। महाधनुर्धर द्रोणाचार्य और महाबली अश्वत्थामा उनके पीछे-पीछे चलें। 12॥
 
May the brave Shantanunandan Bhishma, who is brave and courageous, move towards the army of the Pandavas, protected by your mighty sons. The great archer Dronacharya and the mighty Ashwatthama followed him. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)