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mahabharat 6.108.55: वीर! इस महायुद्ध में हम उपहास का पात्र न बनें, इसका पूरा प्रयत्न करो। युद्धभूमि में पितामह भीष्म का वध अवश्य करो॥ 55॥   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  6.108.55 
नावहास्या यथा वीर भवेम परमाहवे।
तथा कुरु रणे यत्नं साधयस्व पितामहम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
वीर! इस महायुद्ध में हम उपहास का पात्र न बनें, इसका पूरा प्रयत्न करो। युद्धभूमि में पितामह भीष्म का वध अवश्य करो॥ 55॥
 
Valiant! Make every effort to ensure that we do not become a laughing stock in this great war. Make sure to kill Grandfather Bhishma on the battlefield.॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)