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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना
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श्लोक 54
श्लोक
6.108.54
अहत्वा समरे भीष्मं यदि यास्यसि मारिष।
अवहास्योऽस्य लोकस्य भविष्यसि मया सह॥ ५४॥
अनुवाद
आर्य! यदि तुम भीष्म को मारे बिना युद्धभूमि से लौट जाओगे, तो मेरे साथ-साथ तुम भी इस संसार में उपहास के पात्र बनोगे॥ 54॥
Arya! If you return from the battlefield without killing Bhishma, then you along with me will become a laughing stock in this world. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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