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mahabharat 6.108.53: महाबाहु! महाबली भीष्म युद्ध में तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकते, इसलिए आज तुम पूरी शक्ति से उन पर आक्रमण करो।   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.108.53 
न हि ते संयुगे पीडां शक्त: कर्तुं महाबल:।
तस्मादद्य महाबाहो यत्नाद् भीष्ममभिद्रव॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु! महाबली भीष्म युद्ध में तुम्हें हानि नहीं पहुँचा सकते, इसलिए आज तुम पूरी शक्ति से उन पर आक्रमण करो।
 
Mahabaho! The mighty Bhishma cannot harm you in the war, so attack him today with all your might.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)