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mahabharat 6.108.52: हे वीर! मैं सदैव तुम्हारे साथ रहकर अपने बाणों से शत्रुओं को भगाता रहूँगा। अतः तुम क्रोधपूर्वक उन भयंकर भीष्म पर आक्रमण करो।   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.108.52 
अहं त्वामनुयास्यामि परान् विद्रावयञ्शरै:।
अभिद्रव सुसंरब्धो भीष्मं भीमपराक्रमम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! मैं सदैव तुम्हारे साथ रहकर अपने बाणों से शत्रुओं को भगाता रहूँगा। अतः तुम क्रोधपूर्वक उन भयंकर भीष्म पर आक्रमण करो।
 
Valiant one! I will always be by your side, chasing away the enemies with my arrows. Therefore, you should attack the fearsome Bhishma with anger. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)