श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.108.50 
संजय उवाच
एवमुक्त्वा ततो भीष्मं पञ्चभिर्नतपर्वभि:।
अविध्यत रणे भीष्मं प्रणुन्नं वाक्यसायकै:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! ऐसा कहकर शिखण्डी ने शब्दबाणों से पीड़ित भीष्म को पाँच मुड़े हुए बाणों से घायल कर दिया।
 
Sanjaya says: O King! Having said this, Shikhandi wounded Bhishma, who had earlier been afflicted with the arrows of words, with five arrows having bent ends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)