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mahabharat 6.108.5: उस समय भीमसेन और अर्जुन शिखंडी के रथ के पहियों की रक्षा करने लगे। द्रौपदी के पाँचों पुत्रों और सुभद्रा के पुत्र वीर अभिमन्यु ने उसके पिछले भाग की रक्षा का भार अपने ऊपर ले लिया।   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.108.5 
चक्ररक्षौ ततस्तस्य भीमसेनधनंजयौ।
पृष्ठतो द्रौपदेयाश्च सौभद्रश्चैव वीर्यवान्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय भीमसेन और अर्जुन शिखंडी के रथ के पहियों की रक्षा करने लगे। द्रौपदी के पाँचों पुत्रों और सुभद्रा के पुत्र वीर अभिमन्यु ने उसके पिछले भाग की रक्षा का भार अपने ऊपर ले लिया।
 
At that time Bhimasena and Arjuna became protectors of the wheels of Shikhandi's chariot. Draupadi's five sons and the valiant Abhimanyu, son of Subhadra, took up the responsibility of protecting his rear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)