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mahabharat 6.108.48: मैं सत्य की शपथ लेकर कहता हूँ कि आज मैं अवश्य ही तुम्हारा वध करूँगा। मुझसे यह सुनकर जो कुछ तुम्हें करना हो, करो॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  6.108.48 
ध्रुवं च त्वां हनिष्यामि शपे सत्येन तेऽग्रत:।
एतच्छ्रुत्वा च मद्वाक्यं यत् कृत्यं तत् समाचर॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
मैं सत्य की शपथ लेकर कहता हूँ कि आज मैं अवश्य ही तुम्हारा वध करूँगा। मुझसे यह सुनकर जो कुछ तुम्हें करना हो, करो॥ 48॥
 
‘I swear to you in the name of truth that I will surely kill you today. After hearing this from me, do whatever you want to do.॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)