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mahabharat 6.108.47: हे पुरुषोत्तम! महापुरुष! आज मैं पाण्डवों को तथा स्वयं को प्रसन्न करने के लिए युद्धभूमि में वीरतापूर्वक तुम्हारे साथ युद्ध करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.108.47 
पाण्डवानां प्रियं कुर्वन्नात्मनश्च नरोत्तम।
अद्य त्वां योधयिष्यामि रणे पुरुषसत्तम॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! महापुरुष! आज मैं पाण्डवों को तथा स्वयं को प्रसन्न करने के लिए युद्धभूमि में वीरतापूर्वक तुम्हारे साथ युद्ध करूँगा।
 
Best of men! Great man! Today, to please the Pandavas as well as myself, I will fight you bravely in the battle-field. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)