श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.108.44 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा शिखण्डी क्रोधमूर्च्छित:।
उवाचैनं तथा भीष्मं सृक्किणी परिसंलिहन्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर शिखण्डी क्रोध से अचेत हो गया और अपने मुख के कोने चाटता हुआ भीष्म से इस प्रकार बोला-॥44॥
 
On hearing this, Shikhandi became unconscious with anger and licking the corners of his face, spoke to Bhishma thus -॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)