vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना
»
श्लोक 41
श्लोक
6.108.41
तं शिखण्डी त्रिभिर्बाणैरभ्यविध्यत् स्तनान्तरे।
आशीविषमिव क्रुद्धं कालसृष्टमिवान्तकम्॥ ४१॥
अनुवाद
तब शिखण्डी ने तीन बाणों से भीष्म की छाती पर प्रहार किया। उस समय वे क्रोध और काल के कारण उत्पन्न हुए विषधर सर्प के समान दिखाई दे रहे थे।
Then Shikhandi struck Bhishma's chest with three arrows. At that time he looked like a poisonous snake filled with anger and death caused by time. 41.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×