श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.108.41 
तं शिखण्डी त्रिभिर्बाणैरभ्यविध्यत् स्तनान्तरे।
आशीविषमिव क्रुद्धं कालसृष्टमिवान्तकम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
तब शिखण्डी ने तीन बाणों से भीष्म की छाती पर प्रहार किया। उस समय वे क्रोध और काल के कारण उत्पन्न हुए विषधर सर्प के समान दिखाई दे रहे थे।
 
Then Shikhandi struck Bhishma's chest with three arrows. At that time he looked like a poisonous snake filled with anger and death caused by time. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)