श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.108.4 
कृत्वा व्यूहं महाराज सर्वशत्रुनिबर्हणम्।
शिखण्डी सर्वसैन्यानामग्र आसीद् विशाम्पते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हे प्रजानाथ! उस दिन शिखण्डी स्वयं समस्त शत्रुओं का नाश करने वाली व्यूह रचना करके समस्त सेना के सामने खड़ा था॥4॥
 
Maharaj! O Prajanath! That day Shikhandi himself stood in front of the entire army, forming a formation that could destroy all enemies. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)