श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  6.108.39-40 
न चैनं वारयामासुर्व्यात्ताननमिवान्तकम्॥ ३९॥
दशमेऽहनि सम्प्राप्ते रथानीकं शिखण्डिन:।
अदहन्निशितैर्बाणै: कृष्णवर्त्मेव काननम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वे भीष्म को रोक न सके, जो मृत्यु के समान मुख खोले हुए थे। दसवें दिन भीष्म ने अपने तीखे बाणों की अग्नि से शिखण्डी की रथसेना को उसी प्रकार जलाना आरम्भ कर दिया, जैसे दावानल वन को जला देता है।
 
They could not stop Bhishma who was like death with his mouth wide open. On the tenth day Bhishma started burning Shikhandi's chariot army with the fire of his sharp arrows just as a forest fire burns down a forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)