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mahabharat 6.108.36: युद्धभूमि में लड़ते समय भीष्म का विशाल धनुष, इन्द्रधनुष के समान, सदैव गोलाकार दिखाई देता था।   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.108.36 
मण्डलीभूतमेवास्य नित्यं धनुरदृश्यत।
संग्रामे युद्धॺमानस्य शक्रचापोपमं महत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में लड़ते समय भीष्म का विशाल धनुष, इन्द्रधनुष के समान, सदैव गोलाकार दिखाई देता था।
 
While fighting on the battlefield, Bhishma's huge bow, like a rainbow, always appeared circular.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)