श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.108.34 
तमेकं समरे भीष्मं त्वरमाणं महारथम्।
पाण्डवा: समवर्तन्त वज्रहस्तमिवासुरा:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में चपलता दिखाने वाले एकमात्र कुशल योद्धा भीष्म पर समस्त पाण्डवों ने उसी प्रकार आक्रमण किया, जैसे राक्षस वज्र धारण किए हुए इन्द्र पर आक्रमण करते हैं॥34॥
 
All the Pandavas attacked Bhishma, the only expert warrior who showed agility in the battlefield, just like the demons attack Indra wielding the thunderbolt. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)