श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  6.108.32-33 
रथिनोऽपातयद् राजन् रथेभ्य: पुरुषर्षभ:॥ ३२॥
सादिनश्चाश्वपृष्ठेभ्य: पादातांश्च समागतान्।
गजारोहान् गजेभ्यश्च परेषां जयकारिण:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! उन पुरुषश्रेष्ठ भीष्म ने बहुत से रथियों को उनके रथों से, बहुत से घुड़सवारों को उनके घोड़ों की पीठ से, बहुत से हाथीसवारों को उनके हाथियों से शत्रुओं को जीतने वाले तथा बहुत से पैदल सैनिकों को जो उनके सामने आये थे, मार डाला ॥32-33॥
 
O King! That best of men Bhishma killed many charioteers from their chariots, many horse-riders from the backs of their horses, many elephant-riders who had conquered their enemies from their elephants, and many foot soldiers who had come in front of him. ॥ 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)