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mahabharat 6.108.31-32h: उन्होंने बड़े बल और क्रोध से अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाकर युद्धस्थल में पाँचों महारथियों को मार डाला। क्रोधवश उन्होंने असंख्य हाथियों और घोड़ों को भी नष्ट कर दिया। ॥31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  6.108.31-32h 
नानाशस्त्रास्त्रवर्षैस्तान् वीर्यामर्षप्रवेरितै:॥ ३१॥
निजघ्ने समरे क्रुद्धो हस्त्यश्वं चामितं बहु।
 
 
अनुवाद
उन्होंने बड़े बल और क्रोध से अनेक प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाकर युद्धस्थल में पाँचों महारथियों को मार डाला। क्रोधवश उन्होंने असंख्य हाथियों और घोड़ों को भी नष्ट कर दिया। ॥31 1/2॥
 
With great force and anger, he slew various kinds of weapons and killed all five great warriors in the battlefield. In his wrath, he also destroyed innumerable elephants and horses. ॥ 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)