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mahabharat 6.108.29-30h: उन महान धनुर्धर एवं प्रचण्ड योद्धा भीष्म ने प्राणों की आसक्ति त्यागकर पाण्डवों, पांचालों तथा सृंजयों पर नाराच, वत्सदन्त तथा अंजलिका आदि तीक्ष्ण बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  6.108.29-30h 
स पाण्डवान् महेष्वास: पञ्चालांश्चैव सृंजयान्।
नाराचैर्वत्सदन्तैश्च शितैरञ्जलिकैस्तथा॥ २९॥
अभ्यवर्षत दुर्धर्षस्त्यक्त्वा जीवितमात्मन:।
 
 
अनुवाद
उन महान धनुर्धर एवं प्रचण्ड योद्धा भीष्म ने प्राणों की आसक्ति त्यागकर पाण्डवों, पांचालों तथा सृंजयों पर नाराच, वत्सदन्त तथा अंजलिका आदि तीक्ष्ण बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
That great archer and fierce warrior Bhishma, giving up the attachment to life, started showering sharp arrows like Narach, Vatsadanta and Anjalika on the Pandavas, Panchalas and Srinjayas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)