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mahabharat 6.108.28: हे प्रभु! उस समय भीष्म युद्धस्थल में शत्रुओं द्वारा अपनी सेना का संहार, मनुष्य, हाथी और घोड़ों का विनाश सहन नहीं कर सके।   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.108.28 
तं विनाशं मनुष्येन्द्र नरवारणवाजिनाम्।
नामृष्यत तदा भीष्म: सैन्यघातं रणे परै:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! उस समय भीष्म युद्धस्थल में शत्रुओं द्वारा अपनी सेना का संहार, मनुष्य, हाथी और घोड़ों का विनाश सहन नहीं कर सके।
 
O Lord! At that time, Bhishma could not tolerate the destruction of men, elephants and horses - the slaughter of his army by the enemies on the battlefield. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)