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mahabharat 6.108.27: हे पाण्डु के ज्येष्ठ भ्राता! वीर पाण्डव हृदय में हर्ष और उत्साह से भरे हुए आपके पुत्र की सेना का विनाश करते हुए आगे बढ़े॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 6.108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.108.27 
प्रहृष्टमनस: शूरा: पाण्डवा: पाण्डुपूर्वज।
अभ्यवर्तन्त निघ्नन्तस्तव पुत्रस्य वाहिनीम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डु के ज्येष्ठ भ्राता! वीर पाण्डव हृदय में हर्ष और उत्साह से भरे हुए आपके पुत्र की सेना का विनाश करते हुए आगे बढ़े॥ 27॥
 
Elder brother of Pandu! The valiant Pandavas, filled with joy and enthusiasm in their hearts, advanced forward, destroying your son's army.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)