श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 108: दसवें दिन उभयपक्षकी सेनाका रणके लिये प्रस्थान तथा भीष्म और शिखण्डीका समागम एवं अर्जुनका शिखण्डीको भीष्मका वध करनेके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  6.108.2-3 
संजय उवाच
ततस्ते पाण्डवा: सर्वे सूर्यस्योदयनं प्रति।
ताडॺमानासु भेरीषु मृदङ्गेष्वानकेषु च॥ २॥
ध्मायत्सु दधिवर्णेषु जलजेषु समन्तत:।
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य निर्याता: पाण्डवा युधि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- राजन! तत्पश्चात, जब सूर्य उदय हुआ, तब युद्ध की घंटियाँ बजने लगीं, मृदंग और नगाड़े बजने लगे तथा दही के समान श्वेत रंग के शंख सर्वत्र बजने लगे। उस समय शिखण्डी को आगे रखकर सभी पाण्डव युद्ध के लिए शिविर से बाहर निकल आए।
 
Sanjay said- Rajan! Thereafter, when the sun rose, war-bells were rung, mridangams and drums were beaten, and conch shells, which were white in color like curd, were blown everywhere. At that time all the Pandavas came out of the camp for war, keeping Shikhandi in front. 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)