Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.107.d3: यह सोचकर कि हम महान बल और पराक्रम से संपन्न भीष्म को कैसे हरा सकते हैं, राजा युधिष्ठिर ने उनके शिविर में जाने का विचार किया।   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  6.107.d3 
(कथं जयेम भीष्मं वै महाबलपराक्रमम्।
बुद्धिं स्वशिबिरं गन्तुं चक्रे राजा युधिष्ठिर:॥ )
 
 
अनुवाद
यह सोचकर कि हम महान बल और पराक्रम से संपन्न भीष्म को कैसे हरा सकते हैं, राजा युधिष्ठिर ने उनके शिविर में जाने का विचार किया।
 
Wondering how can we defeat Bhishma who was endowed with great strength and valour, King Yudhishthira thought of going to his camp.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)