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mahabharat 6.107.99: भयंकर योद्धा भीष्म मुख खोले हुए मृत्यु के समान प्रतीत होते हैं। आपके अतिरिक्त कोई भी उनसे युद्ध नहीं कर सकता, चाहे वह वज्रधारी इन्द्र ही क्यों न हो॥99॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  6.107.99 
न हि भीष्मं दुराधर्षं व्यात्ताननमिवान्तकम्।
त्वदन्य: शक्नुयाद् योद्‍धुमपि वज्रधर: स्वयम्॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
भयंकर योद्धा भीष्म मुख खोले हुए मृत्यु के समान प्रतीत होते हैं। आपके अतिरिक्त कोई भी उनसे युद्ध नहीं कर सकता, चाहे वह वज्रधारी इन्द्र ही क्यों न हो॥99॥
 
The fierce warrior Bhishma appears like the mouth of death with its mouth wide open. No one except you, even if it is Indra himself who holds the thunderbolt, can fight with him.॥ 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)