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mahabharat 6.107.92: वासुदेव! बचपन में क्रीड़ा करते समय मैं उस महान आत्मा को अपने धूलियुक्त शरीर से सदैव कलुषित करता रहता था॥ 92॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  6.107.92 
क्रीडता हि मया बाल्ये वासुदेव महामना:।
पांसुरूषितगात्रेण महात्मा परुषीकृत:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
वासुदेव! बचपन में क्रीड़ा करते समय मैं उस महान आत्मा को अपने धूलियुक्त शरीर से सदैव कलुषित करता रहता था॥ 92॥
 
Vasudev! During my childhood, while playing, I always polluted that great soul with my dusty body.॥ 92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)