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mahabharat 6.107.85-86h: मैं संसार में भाग्यवान भगवान श्रीकृष्ण या पाण्डवपुत्र धनंजय के अतिरिक्त किसी को नहीं देखता जो युद्ध के लिए उद्यत होने पर मुझे मार सके।॥85 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 85-86h
 
 
श्लोक  6.107.85-86h 
न तं पश्यामि लोकेषु मां हन्याद् य: समुद्यतम्॥ ८५॥
ऋते कृष्णान्महाभागात् पाण्डवाद् वा धनञ्जयात्।
 
 
अनुवाद
मैं संसार में भाग्यवान भगवान श्रीकृष्ण या पाण्डवपुत्र धनंजय के अतिरिक्त किसी को नहीं देखता जो युद्ध के लिए उद्यत होने पर मुझे मार सके।॥85 1/2॥
 
I do not see anyone in the world other than the fortunate Lord Krishna or Pandava's son Dhananjaya who can kill me if I am ready for a fight. ॥ 85 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)