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न तं पश्यामि लोकेषु मां हन्याद् य: समुद्यतम्॥ ८५॥
ऋते कृष्णान्महाभागात् पाण्डवाद् वा धनञ्जयात्।
अनुवाद
मैं संसार में भाग्यवान भगवान श्रीकृष्ण या पाण्डवपुत्र धनंजय के अतिरिक्त किसी को नहीं देखता जो युद्ध के लिए उद्यत होने पर मुझे मार सके।॥85 1/2॥
I do not see anyone in the world other than the fortunate Lord Krishna or Pandava's son Dhananjaya who can kill me if I am ready for a fight. ॥ 85 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥