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mahabharat 6.107.79-80h: राजा, यह निश्चय सुनिए जो मैंने पहले ही कर लिया है। मैं उस व्यक्ति से कभी युद्ध नहीं कर सकता जिसके ध्वज पर अशुभ चिह्न अंकित हो।   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 79-80h
 
 
श्लोक  6.107.79-80h 
इमं मे शृणु राजेन्द्र संकल्पं पूर्वचिन्तितम्॥ ७९॥
अमङ्गल्यध्वजं दृष्ट्वा न युध्येयं कदाचन।
 
 
अनुवाद
राजा, यह निश्चय सुनिए जो मैंने पहले ही कर लिया है। मैं उस व्यक्ति से कभी युद्ध नहीं कर सकता जिसके ध्वज पर अशुभ चिह्न अंकित हो।
 
King, listen to this resolution that I have made beforehand. I can never fight a man whose flag has an inauspicious symbol on it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)