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mahabharat 6.107.74-75h: वज्रधारी इन्द्र, वरुण और यम - इन सबको हराया जा सकता है; किन्तु इन्द्र तथा अन्य देवता और दैत्य भी तुम्हें युद्धभूमि में नहीं हरा सकते।   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 74-75h
 
 
श्लोक  6.107.74-75h 
शक्यो वज्रधरो जेतुं वरुणोऽथ यमस्तथा॥ ७४॥
न भवान् समरे शक्य: सेन्द्रैरपि सुरासुरै:।
 
 
अनुवाद
वज्रधारी इन्द्र, वरुण और यम - इन सबको हराया जा सकता है; किन्तु इन्द्र तथा अन्य देवता और दैत्य भी तुम्हें युद्धभूमि में नहीं हरा सकते।
 
The thunderbolt-wielding Indra, Varuna and Yama – all of them can be defeated; but even Indra and other gods and demons cannot defeat you in the battlefield. 74 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)