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mahabharat 6.107.73-74h: युधिष्ठिर बोले, "पितामह! कृपया हमें वह उपाय बताइए जिससे हम क्रोध से भरे हुए युद्ध में आपको दण्ड धारण किए हुए यमराज के समान परास्त कर सकें।" 73 1/2   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 73-74h
 
 
श्लोक  6.107.73-74h 
युधिष्ठिर उवाच
ब्रूहि तस्मादुपायं नो यथा युद्धे जयेमहि॥ ७३॥
भवन्तं समरे क्रुद्धं दण्डहस्तमिवान्तकम्।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "पितामह! कृपया हमें वह उपाय बताइए जिससे हम क्रोध से भरे हुए युद्ध में आपको दण्ड धारण किए हुए यमराज के समान परास्त कर सकें।" 73 1/2
 
Yudhishthira said, "Grandfather! Please tell us the way by which we can defeat you in a war filled with rage like Yamaraja holding a stick." 73 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)