Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.107.72-73h: कुन्तीकुमार! मैं तुम्हें आज्ञा देता हूँ। तुम प्रसन्नतापूर्वक मुझ पर आक्रमण करो। मैं इसे तुम्हारा पुण्य मानता हूँ कि तुमने मेरी शक्ति जान ली है। यदि मैं मारा गया तो समस्त कौरव सेना मृत समान हो जाएगी; अतः तुम भी ऐसा ही करो (मुझे मार डालो)॥72 1/2॥ | mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनुजानामि व: पार्था: प्रहरध्वं यथासुखम्।
एवं हि सुकृतं मन्ये भवतां विदितो ह्यहम्॥ ७२॥
हते मयि हतं सर्वं तस्मादेवं विधीयताम्।
अनुवाद
कुन्तीकुमार! मैं तुम्हें आज्ञा देता हूँ। तुम प्रसन्नतापूर्वक मुझ पर आक्रमण करो। मैं इसे तुम्हारा पुण्य मानता हूँ कि तुमने मेरी शक्ति जान ली है। यदि मैं मारा गया तो समस्त कौरव सेना मृत समान हो जाएगी; अतः तुम भी ऐसा ही करो (मुझे मार डालो)॥72 1/2॥
Kuntikumar! I command you. You may attack me with pleasure. I consider it a merit for you that you have come to know of my power that if I am killed the entire Kaurava army will be as good as dead; hence do the same (kill me)'॥ 72 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥