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mahabharat 6.107.71: पाण्डवों! यदि मैं किसी प्रकार युद्ध में पराजित हो जाऊँ, तभी तुम युद्धभूमि में विजयी होगे। यदि तुम युद्ध में विजय चाहते हो, तो शीघ्रतापूर्वक मुझ पर (घातक) आक्रमण करो॥ 71॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  6.107.71 
निर्जिते मयि युद्धेन रणे जेष्यथ पाण्डवा:।
क्षिप्रं मयि प्रहरध्वं यदीच्छथ रणे जयम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों! यदि मैं किसी प्रकार युद्ध में पराजित हो जाऊँ, तभी तुम युद्धभूमि में विजयी होगे। यदि तुम युद्ध में विजय चाहते हो, तो शीघ्रतापूर्वक मुझ पर (घातक) आक्रमण करो॥ 71॥
 
Pandavas! If I am somehow defeated in the war, only then you will be victorious in the battlefield. If you want victory in the war, then attack me quickly (lethally).॥ 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)