Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.107.7: भीष्म के बाणों से पाण्डव अत्यन्त पीड़ित हो रहे थे। युद्धभूमि में भीष्म के पराक्रम का चिन्तन करके उन्हें शान्ति नहीं मिल रही थी।॥7॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.107.7 
भीष्मस्य समरे कर्म चिन्तयानास्तु पाण्डवा:।
नालभन्त तदा शान्तिं भीष्मबाणप्रपीडिता:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म के बाणों से पाण्डव अत्यन्त पीड़ित हो रहे थे। युद्धभूमि में भीष्म के पराक्रम का चिन्तन करके उन्हें शान्ति नहीं मिल रही थी।॥7॥
 
The Pandavas were suffering immensely from Bhishma's arrows. They did not get any peace thinking about Bhishma's prowess in the battlefield. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)