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mahabharat 6.107.66-67h: हे भरतश्रेष्ठ, शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले! आप रथों, घोड़ों, पैदल सैनिकों और हाथियों का भी नाश करने वाले हैं। आपको कौन पराजित करने का साहस कर सकता है?॥66 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  6.107.66-67h 
रथाश्वनरनागानां हन्तारं परवीरहन्॥ ६६॥
कोऽथ वोत्सहते जेतुं त्वां पुमान् भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ, शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले! आप रथों, घोड़ों, पैदल सैनिकों और हाथियों का भी नाश करने वाले हैं। आपको कौन पराजित करने का साहस कर सकता है?॥66 1/2॥
 
O best of the Bharatas, destroyer of enemy warriors! You are the destroyer of chariots, horses, men on foot and elephants as well. Who can dare to defeat you?॥ 66 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)