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mahabharat 6.107.64: वीर! युद्धस्थल में हम आपका वेग कैसे सहन कर सकते हैं? कुरुवंश के वृद्ध पितामह! आपमें किंचितमात्र भी दोष (दोष) नहीं दिखाई देता॥ 64॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.107.64 
भवन्तं समरे वीर विषहेम कथं वयम्।
न हि ते सूक्ष्ममप्यस्ति रन्ध्रं कुरुपितामह॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
वीर! युद्धस्थल में हम आपका वेग कैसे सहन कर सकते हैं? कुरुवंश के वृद्ध पितामह! आपमें किंचितमात्र भी दोष (दोष) नहीं दिखाई देता॥ 64॥
 
Valiant! How can we bear your speed in the battlefield? Old patriarch of the Kuru clan! Not even the smallest flaw (fault) is visible in you.॥ 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)