Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.107.61-62h: जब गंगापुत्र भीष्म प्रसन्नतापूर्वक बार-बार ऐसा कह रहे थे, उस समय राजा युधिष्ठिर ने विनीत मन से प्रेमपूर्वक ये वचन कहे-॥61 1/2॥ | mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा ब्रुवाणं गाङ्गेयं प्रीतियुक्तं पुन: पुन:॥ ६१॥
उवाच राजा दीनात्मा प्रीतियुक्तमिदं वच:।
अनुवाद
जब गंगापुत्र भीष्म प्रसन्नतापूर्वक बार-बार ऐसा कह रहे थे, उस समय राजा युधिष्ठिर ने विनीत मन से प्रेमपूर्वक ये वचन कहे-॥61 1/2॥
When Ganga's son Bhishma was saying this happily again and again, at that time King Yudhishthira with a humble heart said these words lovingly -॥ 61 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥