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mahabharat 6.107.58: महाराज! पाण्डवों ने भरतश्रेष्ठ भीष्म को प्रणाम किया, उनके चरणों में सिर नवाकर उनकी शरण ली ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  6.107.58 
पूजयन्तो महाराज पाण्डवा भरतर्षभम्।
प्रणम्य शिरसा चैनं भीष्मं शरणमभ्ययु:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! पाण्डवों ने भरतश्रेष्ठ भीष्म को प्रणाम किया, उनके चरणों में सिर नवाकर उनकी शरण ली ॥58॥
 
Maharaj! The Pandavas worshipped the best of the Bharatas, Bhishma, bowing their heads at his feet and took refuge in him. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)