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mahabharat 6.107.53: ‘देवव्रत भीष्म पुण्यात्मा पुरुष हैं। वे दृष्टिमात्र से ही सबको भस्म कर सकते हैं; अतः तुम गंगानन्दन भीष्म के पास जाकर उनसे उनके वध का उपाय पूछो। 53॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.107.53 
देवव्रत: कृती भीष्म: प्रेक्षितेनापि निर्दहेत्।
गम्यतां स वधोपायं प्रष्टुं सागरगासुत:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
‘देवव्रत भीष्म पुण्यात्मा पुरुष हैं। वे दृष्टिमात्र से ही सबको भस्म कर सकते हैं; अतः तुम गंगानन्दन भीष्म के पास जाकर उनसे उनके वध का उपाय पूछो। 53॥
 
‘Devvrat Bhishma is a virtuous man. He can burn everyone with just a glance; Therefore, you must go to Ganganandan Bhishma to ask him the solution to kill him. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)