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mahabharat 6.107.50: जो भीष्म कठोर व्रतों का पालन करते हैं, वही हमें विजय और उपदेश देने वाले हैं। जब हम बचपन में पितृहीन हो गए, तब उन्होंने ही हमारा पालन-पोषण किया था ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.107.50 
स नो जयस्य दाता स्यान्मन्त्रस्य च दृढव्रत:।
बाला: पित्रा विहीनाश्च तेन संवर्धिता वयम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जो भीष्म कठोर व्रतों का पालन करते हैं, वही हमें विजय और उपदेश देने वाले हैं। जब हम बचपन में पितृहीन हो गए, तब उन्होंने ही हमारा पालन-पोषण किया था ॥50॥
 
Bhishma, who strictly observes fasts, can be the giver of victory and advice to us. When we became fatherless in childhood, it was he who brought us up. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)