स हि राज्यस्य मे दाता मन्त्रस्यैव च माधव॥ ४६॥
तस्माद् देवव्रतं भूयो वधोपायार्थमात्मन:।
भवता सहिता: सर्वे प्रयाम मधुसूदन॥ ४७॥
अनुवाद
अतः माधव! भीष्मजी मुझे राज्य और मन्त्र (हितकारी उपदेश) दोनों देंगे। अतः मधुसूदन! हम सब लोग तुम्हारे साथ पुनः देवव्रत भीष्म के पास चलें और उनसे उनके वध का उपाय पूछें। ॥46-47॥
Therefore Madhava! Bhishmaji will give me both the kingdom and mantra (beneficial advice). Therefore Madhusudan! We all should again go with you to Devavrata Bhishma and ask him the way to kill him. ॥ 46-47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥