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mahabharat 6.107.39: हे मनुष्यों के स्वामी! अर्जुन युद्ध में दैत्यों और दानवों सहित समस्त देवताओं को मार सकता है; फिर भीष्म को मारने में क्या बड़ी बात है? 39.   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.107.39 
त्रिदशान् वा समुद्युक्तान् सहितान् दैत्यदानवै:।
निहन्यादर्जुन: संख्ये किमु भीष्मं नराधिप॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! अर्जुन युद्ध में दैत्यों और दानवों सहित समस्त देवताओं को मार सकता है; फिर भीष्म को मारने में क्या बड़ी बात है? 39.
 
O Lord of men! Arjuna can kill all the gods along with the demons and devils in the war; then what is the big deal in killing Bhishma? 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)