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mahabharat 6.107.31: हे राजन! कल युद्ध में तुम मेरा पराक्रम इन्द्र के समान देखोगे। मैं विशाल अस्त्रों से आक्रमण करने वाले भीष्म को उनके रथ से गिरा दूँगा।॥31॥   |   mahabharat अध्याय 6.107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.107.31 
पश्य मे विक्रमं राजन् महेन्द्रस्येव संयुगे।
विमुञ्चन्तं महास्त्राणि पातयिष्यामि तं रथात्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कल युद्ध में तुम मेरा पराक्रम इन्द्र के समान देखोगे। मैं विशाल अस्त्रों से आक्रमण करने वाले भीष्म को उनके रथ से गिरा दूँगा।॥31॥
 
‘O King! Tomorrow in the war you will see my prowess equal to that of Indra. I will knock down Bhishma, who is attacking with huge weapons, from his chariot.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)