श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 107: नवें दिनके युद्धकी समाप्ति, रातमें पाण्डवोंकी गुप्त मन्त्रणा तथा श्रीकृष्णसहित पाण्डवोंका भीष्मसे मिलकर उनके वधका उपाय जानना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.107.30 
यदि भीष्मे हते वीरे जयं पश्यसि पाण्डव।
हन्तास्म्येकरथेनाद्य कुरुवृद्धं पितामहम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र! यदि तुम भीष्म के वध में ही विजय देखते हो, तो आज मैं एक ही रथ के द्वारा कुरुवंश के वृद्ध पितामह भीष्म का वध कर डालूँगा।
 
Son of Pandu! If you see victory only in the killing of Bhishma, then today I shall kill the old grandfather of the Kuru clan, Bhishma, with the help of just one chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)